भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों का आगमन | Bharat mein European Vyapari Company ka Aagman

Date :- 2 weeks ago

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आइए जानते हैं हमारे भारत में यूरोपी कंपनियां कैसे आई | Bharat mein European Vyapari Company ka aana

पुर्तगाली

सन 1498 ईसा पूर्व में पुर्तगाली वास्कोडिगामा ने कालीकट पर पहुंचकर भारत के नए समुद्री मार्ग की खोज की । वास्कोडिगामा वापसी के समय में जो वस्तुएं यहां से ले गया । वह उसे यूरोप में बेचकर अपनी यात्रा खर्च से 7 गुना अधिक कमाई की ।

धीरे-धीरे पुर्तगालियों ने प्रथम फैक्ट्री कोचीन में स्थापित की । पूर्वी भारत में कोरोमंडल के पुलीकट, मसूलीपट्टनम में व्यापारी केंद्र बनाए । 1536 में बंगाल के चटगांव एवं सतगांव में कारखाने स्थापित किए ।

1505 ईसवी में फ्रांस द अल्मोड़ा भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय बनकर आया । 1509 ईसवी में इसका उत्तराधिकारी अल्बूकर्क बना । जो 1510 ईस्वी में बीजापुर से गोवा छीन लिया और इसे पुर्तगाली मुख्यालय बनाया ।

ब्रिटिश व्यापारियों की ईस्ट इंडिया कंपनी 1600 ईश्वी में भारत आई । जो कालांतर में भारत का शासक बन बैठे 1608 इसवी में विलियम हॉकिंस नामक अंग्रेज आया । 1613 ईसवी में सूरत में व्यापारिक कोठी बनाने की अनुमति मिली थी । 1615 में सर टॉमस रो नामक दूत मुगल बादशाह जहांगीर के दरबार में आया ।1640 इसमें में मद्रास की एवं 1686 से कोलकाता की स्थापना की ।

1668 ईस्वी में पुर्तगाली राजकुमारी कैथरीन की शादी ब्रिटिश राजकुमार चाल्स से हुआ । अंग्रेजों को दहेज स्वरूप मुंबई नगर प्राप्त हुआ ।

अंत में पुर्तगाली के हाथ में गोवा, दमन व दीव रह गया जिसे 1961 ईस्वी में भारत ने नियंत्रण कर लिया ।

डच

1602 ईसवी में एक चार्टर्ड द्ववारा डच ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना सरकार के द्वारा किया गया । भारत में डचों का पहला कारखाना 1605 ईसवी में मसूलीपट्टनम में है । और दूसरा कारखाना पोतापुली में स्थापित है । सूरत एवं आगरा में 1621 पटना में 1638 और चिनसुरा में 1653 में कारखाने स्थापित हुआ ।

डच के शक्ति को रोकने के लिए भारत में डच एवं ब्रिटिश के बीच 1759 ईस्वी में वेदरा में युद्ध हुआ । डच पराजित हुए ।

ईस्ट इंडिया कंपनी

1599 ईस्वी में पूर्व के साथ व्यापार करने के लिए व्यापारियों के एक समूह ने एक संगठन बनाया । 31 दिसंबर 1600 को महारानी एलिजाबेथ ने एक चार्टर द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी को व्यापार करने की अनुमति प्रदान की ।

अंग्रेजों की पहली फैक्ट्री 1608 ईस्वी में सूरत में बनी मूसलीपटि्टम 1611 ईसवी में दक्षिण भारत की पहली और भारत की दूसरी फैक्ट्री अंग्रेजों ने स्थापित किए 1693 ईस्वी में मद्रास के स्थानीय राजा से पट्टे का लेकर किलेबंदी की गई जिससे फोर्ट से जोड़ के नाम से जाना जाता है ।

और मैं 1633 ईस्वी में बंगाल के सूबेदार साहूशुजा ने 3000 के बदले व्यापार की अनुमति मिली मिल गई । 1640 ई में होगीली मे फिर पटना में कारखाना स्थापित किया गया ।

डेन

1616 ईस्वी में डेनिस कंपनी का भारत में आगमन हुआ । इसमें तमिलनाडु के टंकुबार में 1620 ईसवी में एवं 1676 ईस्वी में श्रीरामपुर में व्यापार का कारखाना खोल ।

फ्रांसीसी

1664 ईस्वी मे फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना भारत में पहला फ्रांसीसी कारखाना 1668 ईस्वी में सूरत में स्थापित हुआ ।

औरंगजेब की मृत्यु के बाद आने वाले 52 वर्षों में 8 मुगल साम्राज्य गद्दी पर बैठे । 1707 ईस्वी में औरंगजेब की मृत्यु के बाद उसके 3 पुत्र में युद्ध शुरू हो गया । 1707 ईस्वी जाजू ने लड़ाई में मुअज्जम आजम को परास्त किया तथा हैदराबाद के पास 1708 ईसवी में कामबख्स को पराजित किया । फिर बहादुर शाह प्रथम के नाम से नया मुगल बादशाह बना ।

भारत में ब्रिटिश हम फ्रांसीसी व्यापारिक कंपनी के बीच युद्ध

भारत में दोनों के बीच युद्ध ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकारी से प्रारंभ होकर 7 वर्षीय युद्ध के साथ समाप्त हुआ ।

प्रथम कर्नाटक युद्ध

भारत में ने फ्रांसीसी गवर्नर डुप्ले ने मद्रास का घेरा डालकर मद्रास के गवर्नर को आत्मसमर्पण कराया । कर्नाटक के नवाब अनवरउद्दीन को हस्तक्षेप करने पर 1748 ईस्वी में सेंट थॉमे के युद्ध में डुप्ले ने इसे पराजित कर दिया । 1748 ईस्वी में यूरोप में फ्रांस एवं ब्रिटेन के बीच संधि हुई । जिससे मद्रास ब्रिटिश को वापस मिल गया । युद्ध समाप्त हो गया ।

द्वितीय कर्नाटक युद्ध

यह युद्ध 1749 से 1754 ईस्वी तक चला यह युद्ध कर्नाटक के उत्तराधिकारी के लिए था क्लाइव की सूझबूझ के कारण अंग्रेज सफल रहे ।

कर्नाटक का तीसरा युद्ध

1758 से 1763 ईस्वी तक रा 1760 ईस्वी में अंग्रेज सेना ने आयर कूट के नेतृत्व में वार्डीवास की लड़ाई में फ्रांसीसी यों को बुरी तरह से पराजित कर दिया ।

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