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पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास (Panchayati Raj and Rural Development)

Date / October 1, 2021

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Panchayati Raj and Rural Development

ग्रामीण विकास का अर्थ लोगों का आर्थिक सुधार और बड़ा सामाजिक बदलाव दोनों ही है।
प्रारंभ में विकास के लिये मुख्य जोर वृफषि उद्योग, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं संबंधित क्षेत्रों पर दिया गया।
बाद में यह महसूस किया गया कि सरकारी प्रयासों के साथ-साथ पर्याप्त रूप से जमींनी स्तर पर लोगों की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में भागीदारी
हो। ग्रामीण विकास कार्यव्रफमों में लोगों की भागीदारी योजनाओं का विकेंद्रीकरण, भूमि सुधारों को बेहतर तरीके से लागू करना और )ण
की आसान उपलब्धि करवा कर लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। लोकतंत्रा वास्तविक अर्थों में तभी सपफल होगा।

राज एवं ग्रामीण विकास

1. एक हजार आबादी वाले गाँव में एक ग्राम पंचायत गठित
की जाएगी।


2. ग्राम पंचायत में एक हजार की जनसंख्या वाले ग्राम पंचायत
में कम-से-कम 10 वार्ड बनाए जाएंगे तथा एक हजार से
ज्यादा जनसंख्या वाले ग्राम पंचायत में अधिक-से-अधिक
20 वार्ड बनाए जाएंगे।


3. राज्य में ग्राम पंचायतों की संख्या 23006 है।
इसका मुखिया, सरपंच व पंच सदस्य प्रत्यक्ष रूप से जनता
द्वारा चुने जाते हैं, जबकि उप-सरपंच अप्रत्यक्ष रूप से पंचों
द्वारा निर्वाचित होते हैं।


4. प्रत्येक वार्डों की जनसंख्या लगभग एक सी होगी।
ग पचायत म अनुसुचित जाति व अनुसुचित जनजाति
एवं अन्य पिछडे वर्गों के आरक्षण का लाभ दिया जाता है।


5. ग्राम पंचायत में महिलाओं को 50ः आरक्षण प्राप्त है।


6. ग्राम पंचायतें अपने गाँव की पेयजल व्यवस्था, सपर्फाइ ,
आँगनबाड़ियों का संचालन, प्रकाश व्यवस्था, ग्रामीण विकास
की निगरानी आदि करती हैं।


7. पंचायत सचिव, पंचायत द्वारा नियुक्त शासकीय कर्मचारी
होते हैं।


8. मध्य प्रदेश पहला ऐसा राज्य है, जहाँ स्थानीय निकायों में
‘राइट टू रिकॉल’ का प्रावधान शामिल किया गया है।
क्षेत्रा या जनपद पंचायत ;विकास खंडद्ध


9. जिस क्षेत्रा में 5 हशार से अधिक, परंतु 50 हजार से कम
आबादी होती है। उस क्षेत्रा में एक जनपद पंचायत का गठन
किया जाता है। मध्य प्रदेश में क्षेत्रा पंचायतों की संख्या 313 है।


10. इसमें आबादी के अनुसार कम से कम 10 और अधिक से
अधिक 25 निर्वाचन क्षेत्रा होंगे। प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्रों की
जनसंख्या सामान्यतः एक समान होगी।


11. सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा, जबकि अध्यक्ष
व उपाध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित सदस्यों
द्वारा किया जाता है।


12. इसके अलावा इसके पदेन सदस्य के रूप में विधायक और
सरपंच होते हैं।


13. इसमें अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्ग
व महिलाओं के लिये आरक्षण का प्रावधान है।

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